आप सभी प्रियजनों को मेरा सादर नमस्कार।मैं पिंकी वर्मा,"अर्पण नशा मुक्ति केंद्र"रायपुर छत्तीसगढ़ की संचालक मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य,समाज को,नशा से दूर करने का अथक प्रयास करना है।क्योकि नशा,प्रत्येक व्यक्ति यो के लिए एक अभिशाप है।वही नशा,एक अस्थायी आत्महत्या है।नशे की वजह से ही,शारिरिक ,मानसिक एवं सामाजिक दृष्टि से,मनुष्यो में दुष्परिणाम देखने को मिलता है।शारीरिक रूप से देखे तो,शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग ,लिवर ,किडनी आदि का खराब होना।मानसिक रूप से देखे तो ,तनाव का बढ़ना,स्मृति का नष्ट होना,सोचने समझने की क्षमता के क्षीण होने से व क्रोध बढ़ने से हिंसात्मक कार्य को अंजाम देना।वही सामाजिक रूप से देखे तो,बलात्कार,मारपीट, हत्या आदि घिनौनी कृत्य जैसे आपराधिक घटना देखने को मिलता है।नशा,खुद के जीवन को बर्बाद तो करता ही है,साथ ही देश ,समाज एवं घर परिवार में भी,जघन्य अपराध को बढ़ावा देती है।क्योकि नशे के आदि ब्यक्ति के मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव पड़ने से ,वह ब्यक्ति जघन्य अपराध की ओर अग्रसर हो जाता है।जो शांतिपूर्ण समाज व परिवार के लिए अभिशाप बन जाता है।नशा एक ऐसी बुराई है।जिसमे इंसान का अनमोल जीवन,समय से पहले ही ,मौत का शिकार हो जाता है।इन जहरीले व नशीले पदार्थो के सेवन से,शारिरिक ,मानसिक व आर्थिक नुकसान के साथ ही इससे सामाजिक वातावरण भी प्रदूषित होता है।विद्यालय जाने वाले छोटे- छोटे बच्चों सहित विशेषकर युवा वर्ग भी नशे से बुरी तरह से प्रभावित हो रहे है।जो नशे के चंगुल में फस गया,उसका स्वयं का जीवन,बर्बाद तो होता ही है।साथ ही साथ,परिवार भी बर्बाद हो जाता है।अधिकतर लोगों द्वारा सुनने को मिलता है कि ,नशा करने से दुःख, परेशानी एवं चिंता से राहत मिलता है।इसी अज्ञानता की वजह से ,लोग नशे की लत में पड़ जाते है।जबकि वास्तविक तौर पर देखे तो ,नशा अल्प समय के लिए दुख व चिंता को दूर कर सकता है।परंतु दुःख व तनाव को जड़सहित खतम नही कर सकता है।....."मुस्कुराकर, दुःख का जहर जिनको पीना आ गया।यह हकीकत है कि ,उनको जीवन जीना आ गया".....जिस परिस्थिति की वजह से ,दुःख हमारे जीवन मे आता है ,यदि मनुष्य,खुद को बदलने का प्रतिज्ञा ले लेगा,उस दुःख परेशानी का सामना, मुस्कुराकर करना सीखेगा, उस दिन उसका दुःख ,भी हार मानकर ब्यक्ति के जीवन से चला जाएगा।दुःख ,गरीबी, चिंता आदि धूप छाव की तरह होता है।स्थिति परिस्थिति जैसा भी हो ,हर हाल में अच्छे मार्ग की ओर आगे बढ़ना ही जिंदगी है।इस जगत में विघ्न है तो विघ्नहर्ता भी है।किन्तु दुर्भाग्यपूर्ण बात यह भी है कि ,आज के भावी युवा-पीढ़ी भी नशा को,जीवन का आंनद समझकर,निरंतर नशा का सेवन कर रहे है।जबकि देश,समाज व परिवार का तरक्की ही ,इन युवाओं पर टिकी होती है।परंतु आज के भावी युवा,नशा को अपना शान समझते है।समाज ,परिवार व दुसरो की खुसी छीनकर नशायुक्त ब्यक्ति,को भी अपनी मांन सम्मान,शांति,रिश्ता नाता,मित्रता ,यहां तक कि अपना खुद का किमती जीवन आदि प्रिय चीजे खोनी पड़ती है।समय रहते, भावी युवाओ से लेकर सभी नशा कर रहे इंसानो को,देश ,समाज व परिवार हित हेतु नशा छोड़कर सही मार्ग की ओर उन्मुख होनी चाहिए।क्योकि इस अभिशाप से, समय रहते ही मुक्ति पा लेना ही,सभी मानव समाज की भलाई है।अंतिम में अपनी वाणी को विराम देते हुए अपनी भावनाओं को आप सभी के समक्ष अभिव्यक्त कर रही हूँ कि ,अभिभावक समझे कि,अपने बच्चो का भविष्य ना खराब करे।बच्चों को अच्छा संस्कार दे व उन्हें एक बेहतरीन शिक्षा प्रदान करे।वन्दे मातरम, जय छत्तीसगढ़, धन्यवाद.....
अर्पण नशा मुक्ति केंद्र , अपने मरीजों का समर्थन करने के लिए अनुभवी कर्मचारियों और डॉक्टरों के साथ काम करते हैं ।
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