आप सभी प्रियजनों को मेरा सादर नमस्कार।मैं पिंकी वर्मा,"अर्पण नशा मुक्ति केंद्र"रायपुर छत्तीसगढ़ की संचालक मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य,समाज को,नशा से दूर करने का अथक प्रयास करना है।क्योकि नशा,प्रत्येक व्यक्ति यो के लिए एक अभिशाप है।वही नशा,एक अस्थायी आत्महत्या है।नशे की वजह से ही,शारिरिक ,मानसिक एवं सामाजिक दृष्टि से,मनुष्यो में दुष्परिणाम देखने को मिलता है।शारीरिक रूप से देखे तो,शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग ,लिवर ,किडनी आदि का खराब होना।मानसिक रूप से देखे तो ,तनाव का बढ़ना,स्मृति का नष्ट होना,सोचने समझने की क्षमता के क्षीण होने से व क्रोध बढ़ने से हिंसात्मक कार्य को अंजाम देना।वही सामाजिक रूप से देखे तो,बलात्कार,मारपीट, हत्या आदि घिनौनी कृत्य जैसे आपराधिक घटना देखने को मिलता है।नशा,खुद के जीवन को बर्बाद तो करता ही है,साथ ही देश ,समाज एवं घर परिवार में भी,जघन्य अपराध को बढ़ावा देती है।क्योकि नशे के आदि ब्यक्ति के मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव पड़ने से ,वह ब्यक्ति जघन्य अपराध की ओर अग्रसर हो जाता है।
अर्पण नशा मुक्ति केंद्र , अपने मरीजों का समर्थन करने के लिए अनुभवी कर्मचारियों और डॉक्टरों के साथ काम करते हैं ।
नि:शुल्क 30 मिनट की परामर्श सेवा की बुकिंग करें, पुरुष और महिला दोनों के लिए सुविधा उपलब्ध है, 24*7 निगरानी, 24*7 सेवाएं
जो चीज़ वास्तव में अर्पण नशा मुक्ति केंद्र को अलग करती है, वह है समूह चिकित्सा सत्र और एक-पर-एक परामर्श, दोनों ही हमारे रोगियों के लिए अविश्वसनीय रूप से फायदेमंद साबित हुए हैं। ये सार्थक बातचीत सफल पुनर्वास के लिए आवश्यक समर्थन और समझ प्रदान करती है, जिससे अर्पण नशा मुक्ति केंद्र नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए आशा की किरण बन जाता है।
आपको इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हम सलाहामदद के बाद प्रवेश ले सकते हैं।
हम हमारे ग्राहकों की सेवा के लिए किसी भी समय उपलब्ध हैं, सेवा में किसी भी देरी के बिना।
हम अनुभवी कर्मचारी रखते हैं, जिसमें मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक और नर्सेज भी शामिल हैं।
हम एक उन्नत निगरानी प्रणाली का उपयोग करते हैं, जिससे हम लताधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।
आप सभी प्रियजनों को मेरा सादर नमस्कार।मैं पिंकी वर्मा,"अर्पण नशा मुक्ति केंद्र"रायपुर छत्तीसगढ़ की संचालक मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य,समाज को,नशा से दूर करने का अथक प्रयास करना है।
अर्पण नशा मुक्ति केंद्र (नशा मुक्ति केंद्र रायपुर) नशा छुड़ाने हेतु लगातार सफल प्रयास कर रहा है हमारी संस्था में नशे में लिप्त मरीजों को लाने हेतु पिकअप की सुविधा उपलब्ध है अच्छा व पौष्टिक खाना तथा उन्हें नशे से दूर एक सम्मानित जीवन जीना सिखाने के लिए उन्हें मार्ग प्रशस्त किया जाता है साथ ही उनमें नई उमंग एवं जोश भरने के लिए सही मार्गदर्शन, काउंसलिंग, योगा, मेडिटेशन, हीलिंग, आदि कराया जाता है ताकि उनके जीवन में सकारात्मकता आ सके व विचारों में शुद्धता आए। साथ ही साथ युवा वर्ग में बढ़ रहे नशे को रोकने के लिए नशे के संबंध में सही जानकारी प्रदान की जाती है ऐसे परिवार जो मरीज को भर्ती कर उनका इलाज नहीं करवा सकते उनके लिए निःशुल्क परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
अर्पण नशा मुक्ति केंद्र मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, परामर्शदाता, सुरक्षाकर्मी, नर्सिंग स्टाफ, कुशल कुक, की एक अच्छी टीम है जो पूरे समय मिलकर एक साथ कार्य करती है
मादक द्रव्य के उपयोग से व्यवहार में होने वाले विकार को नशा कहते हैं यह एक मानसिक रोग है जो कि व्यक्ति के व्यवहार को परिवर्तित करने का मुख्य कारण है नशे की लत किसी के शरीर को होने वाली ऐसी जरूरत है जिस पर नियंत्रण रखना व्यक्ति के बस के बाहर हो जाता है तथा नशा करना उसके शरीर और दिमाग की जरूरत बन जाता है यह जानते हुए भी कि यह चीज उसके शरीर को भयंकर नुकसान पहुंचा रही है नशा करने वाले इसकी आदत नहीं छोड़ पाते, और सबसे ज्यादा ध्यान देने की बात यह है कि हर केस में नशा करने वाले व्यक्ति में अलग-अलग लक्षण नजर आते हैं |
एक व्यसनी व्यक्ति जो होता है वह समान व्यक्ति की तुलना में अधिक संवेदी होता है, अर्थात उस व्यक्ति में आम व्यक्ति की तुलना में जो संवेदनाएं होती है वह अधिक अस्त-व्यस्त होती है। वह अपने व्यवहारों पर नियंत्रण करना चाहता है परंतु कर नहीं पाता अर्थात् उस में व्यावहारिक नियंत्रण नहीं होता हैं। वह अपनी क्षमताओं व भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाता वह जहां जो व्यवहार प्रदर्शित करना चाहता है वह नही कर पाता। उसके स्थान पर खाली चुप रह जाता है या अत्यधिक बोल जाता है।
ऐसी स्थिति में लोगों को लगता है कि व्यक्ति नशे में बकवास कर रहा है परंतु हर बार यह सच नहीं होता है। कोई व्यक्ति यह नहीं चाहता कि लोग उसे नशेड़ी, बेवड़ा, या शराबी कहे, परिवार में उसकी इज्जत ना करें, यह व्यक्ति स्वयं से प्रताड़ित होते हैं यह व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार होते हैं ये वह व्यक्ति होते हैं जिनमें सामाजिकता की कमी होती है इन व्यक्तियों को आवश्यकता है सही स्नेह, व्यवहार व मार्गदर्शन की, दवाओं की, नियमितता की, दवाओं की, नियमित दिनचर्या की, प्रोत्साहन की, योग की, ध्यान की, व सात्विकता की, इन्हीं के माध्यम से इनके व्यवहारों में व जीवन में परिवर्तन लाया जा सकता है
क्योंकि शराब की वजह से हम समाज में अपना स्थान खो देते हैं! और घरवालों को परेशान करने लग जाते है! और खुद को कई मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पर मजबूर कर देते हैं। कुछ लोग शराब को एक सौक की तरह शुरू करते हैं और कुछ ही समय में वह उसकी एक बुरी आदत बन जाती है। और कुछ लोग किसी ऐसी समस्या या किसी मानसिक या भावनात्मक समस्या के कारण शराब को शुरू करते हैं और इसी में ही डूब जाते हैं वह अंत में शराब व्यक्ति का संपूर्ण जीवन नष्ट कर देती है जिससे वे सब कुछ खो देता है और वह व्यक्ति व्यसनी बन जाता है। यही व्यसनी की सबसे बड़ी समस्या होती है।
वैसे तो सभी नशे को बुरा कहा गया है परंतु सबसे गंदा व घातक नशा ड्रग के नशे को ही कहा गया है। क्योंकि यह दवाएं शरीर पर और मस्तिष्क पर भारी घातक प्रभाव डालती है। मनुष्यो द्वारा विभिन्न प्रकार की दवाओं का निर्माण किया गया है, ये दवाएं हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए बनाए गई है किंतु इन दवाओं का अनुचित प्रयोग बहुत होने लगा है। इसे ही ड्रग दुरुपयोग कहा जाता हैं इन दवाओं का उपयोग जब नशे के लिए किया जाता है तो इन दवाओं से होने वाले नशे की लत को छुड़ाना बहुत कठिन होता है। नशा एक गंभीर समस्या है। नशे का आदी होना आसान है लेकिन इस लत से छुटकारा पाना बेहद मुश्किल है। नशीली दवाओं के लत के कारण होने वाले स्वास्थ्य के मुद्दे, एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति से भिन्न होते हैं। इसे छुड़ाने हेतु विशेष प्रयास की, व दवाओं की, एक नियमित दिनचर्या की , योगाभ्यास की एक साथ आवश्यकता होती है तभी इस ड्रग के नशे से निजात पाया जा सकता है।
यह एक वैज्ञानिक मनोचिकित्सा पद्धति का एक महत्वपूर्ण अंग है जिससे मरीज का मनोवैज्ञानिक परीक्षण कर विभिन्न प्रकार से उसकी काउंसलिंग की जाती है जैसे := एकल परामर्श, समूह परामर्श, पारिवारिक परामर्श बच्चों हेतु परामर्श, वैवाहिक संबंध हेतु परामार्श इत्यादि ।
यह एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है जिसके अंतर्गत कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी, बिहेवियरल मेडिटेशन, मेडिटेशन थेरेपी, एंगर मैनेजमेंट, रिकी, 12 स्टेप थेरेपी, इत्यादि द्वारा मरीज के मस्तिष्क को स्थिर, शान्त रखने का तथा संवेदनाओ को स्थिर रखने का प्रयास किया जाता है।
अनुभवी मनोचिकित्सकों द्वारा रोगों का परीक्षण कर एलोपैथी, होम्योपैथी तथा आयुर्वेदिक दवाओं के माध्यम से चिकित्सा की जाती है संस्था में यह समस्त चिकित्सा पद्धतियां मरीज को एक ही जगह पर उपलब्ध कराई जाती है।
लंबे समय से नशे से पीड़ित व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो चुका होता है। अतः विभिन्न मानसिक विकृतियां उत्पन्न हो जाती है। इन मानसिक विकारों का अवलोकन कर मनोवैज्ञानिको द्वारा मनोवैज्ञानिक परीक्षण करने के पश्चात नशे से पीड़ित व्यक्ति तथा रोगियों का उपयुक्त उपचार विभिन्न आधुनिक चिकित्सीय उपकरणों के माध्यम से किया जाता है।
शरीर व मन की स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम व योगाभ्यास अत्यंत आवश्यक है विभिन्न प्रकार के योग मुद्राओं, व्यायाम के द्वारा शरीर की, मन की, जागृति होती है व्यव्यम से शरीर की अकड़न, मांस पेशियों की अकड़न, आदि को ठीक करता है तथा योग व्याक्ति की मानसिक व आध्यात्मिक जागरण के लिए आवश्यक है। इनके नियमित अभ्यास से शरीर तथा मन में चुस्ती फुर्ती बनी रहती है |